मैडम जी “आप अपनी तरह बनिए।” “जो हो, जैसे हो, वैसे ही रहिए”, “यदि दूसरों के लिए स्वयं को बदलना इतना ही आवश्यक होता तो कुदरत ने सबको एक-दूसरे से यूं भिन्न बनाया ही ना होता ।