‘मन’ का ‘मन’ कभी नही भरता उदाहरण श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरएसएस की चालाकी , बीजेपी का खेल और चंपतराय की चालाकी, आज भारत के सभी हिंदुओं को आरएसएस , बीजेपी और चंपतराय सरीखे चोरों को सबक सिखाने की ठान लिया है ।

हमें पता है “एक सच्चा रिश्ता एक हवा की तरह होता है , एकदम खामोश पर रहता हो हर वक़्त आसपास !!” यही कहानी हम हिंदुओं का भगवान राम से है और इससे छेड़छाड़ सबको भारी पड़ेगा । “किरदार कितना भी साफ क्यों ना हो,”लोग वही सोचेंगे जो उनके मन में होंगा” सबसे पहले जानते है राम मंदिर और राममंदिर में चन्दा चोरी को ..। अयोध्या राम मंदिर (श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) में चढ़ावा/दान (नकद, सोना-चांदी, आभूषण आदि) की कथित चोरी/गबन के आरोप लगे। शुरुआती अनुमान ₹5-7 करोड़ के थे, बाद में कुछ रिपोर्ट्स में ₹1800 करोड़ तक की बात कही गई (हालांकि पुष्टि नहीं)।
राम मंदिर में आए चढ़ावा के रुपए से जलपान कीजिए ” और जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे…हे राम आपके साथ इन लोगों ने किया से किया कर दिया कभी माफ़ नहीं करना….मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में 8 छोटे कर्मचारियों (मछलियों) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और बड़ी -बड़ी मछलियां बचते हुए नजर आ रही है ? श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के खासमखास रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के अलावा अनुकल्प मिश्र,लवकुंश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ला व सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
संज्ञेय अपराध की धाराओं में दर्ज प्राथमिकी में ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय, डॉ.अनिल मिश्रा, गोपाल राव आदि के नाम नहीं हैं आखिर क्यों नहीं है?अगर इन लोगों की गिरफ्तारी होती है तो आरोपितों की संख्या भविष्य में बढ़ सकती है। चोरी के सही मकसद का पता चलेगा, अच्छा होता इसकी जांच सीबीआई से हो जाता तो अच्छा होता और दूध का दूध और पानी का पानी होता।मंदिर के दानपात्रों की धनराशि चोरी मामला 5 जून को प्रकाश में आने के बाद ट्रस्ट के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी अंदर खाने ही जांच पड़ताल शुरु कर चोरी – चुपके धन वसूली का प्रयास किया था।जब इसमें ये लोग सफल नहीं हो पाए तो अंदर खाने बवाल मच गया। बाद में 7 जून को समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने अपने एक्स पर पोस्ट कर इस मामले को सुर्खियों में लाए। 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान में आने के बाद मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा भी अयोध्या पहुंचे व ट्रिस्टयों से जानकारी ली और उनके जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार ने तीन सदस्यीय एसआइटी गठित कर इसके तहत में जाने के बाद जो बात सामने आई सब लोग हाय राम हाय राम करने लगे।
कुछ कर्मचारी (जैसे टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला आदि) गिरफ्तार हुए। आरोप है कि गिनती के दौरान चोरी होती थी, बैंक कर्मियों से सांठगांठ थी, और कुछ संपत्तियां (कार, मकान) खरीदी गईं। SIT (Special Investigation Team) जांच कर रही है। चंपत राय (ट्रस्ट के महासचिव, VHP/RSS से जुड़े) पर लापरवाही, देरी से FIR, और संभावित मिलीभगत के आरोप। उन्होंने और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। SIT ने उनसे 3-4 घंटे पूछताछ की। चंपत राय ने कहा “मेरी सेवा पूरी, कलंक लेकर नहीं जाऊंगा, भरोसा तोड़ा गया।” उन्होंने अपनी भूमिका से इनकार किया और कहा कि जानकारी मिलते ही कार्रवाई की। देश के नजर में आरएसएस-बीजेपी का “खेल” या आंतरिक लापरवाही? ट्रस्ट RSS/VHP/बीजेपी से जुड़े लोगों द्वारा संचालित है।
चंपत राय जैसे लोग लंबे समय से इसमें हैं। विपक्ष (सपा, कांग्रेस) इसे “राम नाम पर लूट” बता रहा है और CAG ऑडिट/जांच की मांग कर रहा है। “किरदार कितना भी साफ क्यों ना हो,”लोग वही सोचेंगे जो उनके मन में होंगा”सिस्टमैटिक गबन का मामला लगता है, जिसमें निचले स्तर के कर्मचारियों और संभवतः कुछ अधिकारियों की लापरवाही/मिलीभगत शामिल है। CCTV फुटेज डिलीट, देरी से FIR, और रिश्तेदारों की नियुक्ति जैसे आरोप हैं।
लेकिन पूरे संगठन को “चालाकी” कहना अतिशयोक्ति है — जांच चल रही है, गिरफ्तारियां हुई हैं, इस्तीफे हुए। RSS ने बयान जारी किया, VHP की बैठक दिल्ली शिफ्ट हुई, और ट्रस्ट 6 जुलाई को बैठक कर रहा है। विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है (खासकर UP में)। चंपत राय की भूमिका वे ट्रस्ट के मजबूत चेहरा रहे, लेकिन आरोपों में घिरे।
उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार की (लापरवाही) लेकिन चोरी में सीधी भूमिका से इनकार किया। कुछ रिपोर्ट्स में उनके करीबियों (अनिल मिश्रा, गोपाल राव) पर भी सवाल। FIR की मांग हुई, लेकिन सीनियर लोगों पर अभी मुख्य FIR नहीं। चोरी/अनियमितताएं हुईं — यह गंभीर है, क्योंकि यह लाखों श्रद्धालुओं के चढ़ावे का मामला है। जांच आगे बढ़ रही है, इसमें पारदर्शिता जरूरी। लेकिन इसे “आरएसएस-बीजेपी का पूरा खेल” कहना राजनीतिक है। मंदिर ट्रस्ट पर जवाबदेही होनी चाहिए, न कि सारा मुद्दा साजिश में बदल जाए। सच्चाई जांच से निकलेगी, न कि यूट्यूब/सोशल मीडिया वाली कहानियों से।

